ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत:। क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की शंकराचार्य को बड़ी राहत: यौन उत्पीड़न केस में गिरफ्तारी पर लगाई रोक, सुरक्षित रखा फैसला

 


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

कोर्ट की 2 बड़ी बातें

​मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने दो महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:

  1. गिरफ्तारी पर रोक: जब तक कोर्ट अग्रिम जमानत याचिका पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।
  2. जांच में सहयोग: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शंकराचार्य को मामले की जांच में पुलिस और संबंधित एजेंसियों का पूरा सहयोग करना होगा।

अदालत में जोरदार बहस: कौन-कौन हुआ पेश?

​इस हाई-प्रोफाइल मामले में दोनों पक्षों की ओर से तीखी दलीलें दी गईं:

  • शंकराचार्य का पक्ष: उनके बचाव में वरिष्ठ वकील पी.एन. मिश्रा ने दलीलें पेश कीं।
  • सरकार का पक्ष: उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल अदालत में उपस्थित हुए।
  • शिकायतकर्ता का पक्ष: शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से वकील रीना सिंह ने अपना पक्ष रखा और जमानत का विरोध किया।

​अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अब इस केस की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे हफ्ते में तय की है।

हाईकोर्ट के फैसले पर शंकराचार्य की प्रतिक्रिया

​राहत मिलने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे संस्थान को बदनाम करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा:

"शंकराचार्य जैसी पवित्र संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई। आज हालात ऐसे हैं कि लोग अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन सारा अमला (तंत्र) भ्रष्ट नहीं हो सकता। कहीं न कहीं कोई ऐसा जरूर होगा जिसके मन में न्याय होगा। इसीलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए।"


​उन्होंने आगे जोड़ा कि इस मामले से पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था और लोग अपने गुरु की छवि को लेकर परेशान थे।

क्या है पूरा मामला?

​यह मामला शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। विपक्ष और शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इसमें गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जबकि शंकराचार्य इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र बता रहे हैं। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने उन्हें फिलहाल कानूनी कार्रवाई और जेल जाने से बचा लिया है।

अगला अपडेट: अब सबकी नजरें मार्च के तीसरे हफ्ते में होने वाली सुनवाई और हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर टिकी हैं।


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