मिर्जापुर/लखनऊ: जनपद मिर्जापुर में लुम्बिनी-दुद्धी मार्ग (एस.एच.-5) के कायाकल्प के लिए शासन द्वारा स्वीकृत ₹70.10 करोड़ की भारी-भरकम राशि अब चर्चा और सवालों के घेरे में है। जहाँ एक ओर इसे विकास का बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं परियोजना के आंकड़ों का विश्लेषण एक अलग कहानी बयां कर रहा है।
करोड़ों का गणित: जनता के पैसे का सही मोल या कुछ और?
परियोजना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27.150 किमी लंबे मार्ग के लिए ₹70,10,41,000 की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि सड़क के हर 1 किलोमीटर हिस्से पर औसतन ₹2.58 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों और सजग नागरिकों का तर्क है कि यदि यह केवल 1.5 मीटर का सामान्य चौड़ीकरण है, तो प्रति किलोमीटर ₹2.6 करोड़ की लागत संदेह पैदा करती है। क्या यह लागत वाकई निर्माण की है या इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश छिपी है?
सिर्फ सड़क नहीं, इन "अदृश्य" खर्चों ने बढ़ाई लागत
शासनादेश के तकनीकी पहलुओं को देखें तो विभाग ने इस भारी बजट के पीछे कई अन्य कार्यों को जोड़ा है:
- यूटिलिटी शिफ्टिंग का भारी बोझ: सड़क निर्माण से पहले बिजली के खंभों को हटाने के लिए ₹571.29 लाख और वन विभाग की बाधाएं दूर करने के लिए ₹205.77 लाख दिए गए हैं। यानी करीब ₹7.7 करोड़ तो केवल "रास्ता साफ" करने में खर्च होंगे।
- पक्के स्ट्रक्चर्स का निर्माण: आदेश में पुराने पुलों, पुलियों के विस्तार और नई नालियों के निर्माण का भी प्रावधान है।
- 5 साल की गारंटी: लागत में 05 वर्षीय अनुरक्षण (Maintenance) की राशि भी शामिल की गई है, जिससे ठेकेदार अगले पांच साल तक सड़क की मरम्मत के लिए जिम्मेदार होगा।
- भारी टैक्स: कुल बजट में 18% GST (वस्तु एवं सेवा कर) भी शामिल है, जो एक बड़ी रकम बैठती है।
शासन की चेतावनी: अफसरों की जेब से होगी वसूली
संभवतः भारी लागत को देखते हुए ही शासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है। शासनादेश में स्पष्ट लिखा है कि यदि परियोजना की लागत में कोई भी अनावश्यक वृद्धि (Cost Overrun) हुई या समय पर काम पूरा नहीं हुआ, तो उसकी वसूली संबंधित मुख्य अभियंता और विभागीय अधिकारियों के वेतन से की जाएगी।
इसके अलावा, विभाग को आदेश दिया गया है कि वे सीमेंट, स्टील और बिटुमिन की वास्तविक खपत का मानक मिलान करें ताकि GST भुगतान में हेराफेरी न हो।
निष्कर्ष
कागजों पर यह परियोजना मिर्जापुर की लाइफलाइन को सुधारने वाली दिखती है, लेकिन ₹2.6 करोड़ प्रति किमी की लागत जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि धरातल पर होने वाला काम इस भारी निवेश के साथ न्याय करता है या यह परियोजना भी सरकारी फाइलों में कैद होकर रह जाती है।
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